Nalanda Madi Village Mosque- हमारे देश भारत में लगभग सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुलकर रहते हैं। लेकिन कभी कभी सांप्रदायिक दंगों के कारण किसी धर्म के लोग को अपना शहर या फिर गांव छोड़कर दुसरे शहर या फिर गांव में जाना पड़ता है। ऐसा ही एक घटना सन 1942 में नालंदा जिले के बेन प्रखंड के माड़ी गांव में हुआ था, जिसमें सांप्रदायिक दंगों के कारण मस्लिम लोगों ने गांव को छोड़ दिया था।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस गांव में लगभग 80 सालों से एक भी मुस्लमान नहीं है फिर भी मस्जिद की साफ सफाई होने के साथ ही मस्जिद में रोजाना पाँचों वक्त की अजान होती है। किसी दुसरे गांव से आने वाले लोगों को यही लगता है कि इस गांव में मुसलमानों की आबादी होगी, लेकिन इस गांव में लगभग 80 सालों से एक भी मुस्लमान नहीं रह रहा है। Nalanda Madi Village Mosque
मस्जिद से जुड़ी है हिन्दुओं की आस्था
रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक इस गांव में रहने वाले हिन्दुओं की आस्था इस मस्जिद से जुड़ी हुई है। यहाँ के लोग मस्जिद और मंदिर में कोई फर्क नहीं करते हैं। गांव में रहने वाले लोग ही मस्जिद की साफ सफाई का ख्याल करते हैं। इस गांव में रहने वाले लोग ख़ुशी के मौका पर मस्जिद के बाहर मत्था टेकते हैं। गांव में रहने वाले लोगों के मुताबिक जो ऐसा नहीं करता है उसपर जरुर कोई मुसीबत आ जाती है।
मस्जिद में कौन देता है अजान- Nalanda Madi Village Mosque
अगर आप भी यही सोच रहे हैं कि इस गांव में जब एक भी मुस्लिम नहीं है तो फिर अजान कौन देता है, तो आपको बता दें कि अजान के शब्दों को रिकोर्ड करके एक पेन ड्राइव में रखा गया है और अजान के समय में इसी रिकोर्डिंग को प्ले कर दिया जाता है।
मस्जिद के बाहर है एक मजार
माड़ी गांव के इस मस्जिद के बाहर एक मजार बना हुआ है जिसपर लोग चादरपोशी करते हैं। बताया जाता है कि यह परंपरा यहाँ सालों से चली आ रही है जिसे यहाँ के लोग निभाते हैं। गांव के लोगों के मुताबिक यहाँ बाढ़ और अगलगी जैसी प्राकृतिक आपदा होती रहती थी, लेकिन तक़रीबन 5 या 6 सौ साल पहले इस गांव में हजरत इस्माइल आए थे जिसके बाद से गांव में कोई आपदा नहीं आई। Nalanda Madi Village Mosque
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