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Motivational success stories- सफलता किसे मिलती है? कुछ लोगों का कहना है कि सफलता कुछ खास लोगों को ही मिलती है। इसी वजह से बहुत से लोग अपनी असफलता के जिम्मेदार साधनों को ठहराते हैं और कहते हैं कि सफल होने के लिए हमारे पास ये चीजें नहीं है। इसके अलावा भी वे और कई तरह के बहाने बनाते हैं। लेकिन ऐसे लोगों ने कभी यह नहीं सोचा कि सफल होने वाले व्यक्ति में क्या खासियत होती है? वह क्योँ सफल होते हैं? दरअसल सफल होने वाले लोगों कि सोच बड़ी होती है, और वे बड़े सपने देखते है और सिर्फ सपने ही नहीं देखते बल्कि उन सपनो को पुरा करने के लिए रात-दिन मेहनत भी करते हैं। आइये बात करते है 4 ऐसे लोगों के बारे में जिन्होंने मेहनत से बदली अपनी ज़िन्दगी।
1. डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम- Motivational success stories
डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर सन 1931 को रामेश्वरम,तमिलनाडु में हुआ था। डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम कोई बहुत ज्यादा पैसे वाले नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपनी मेहनत से कई सफलताओ को हासिल किया। डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम को भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। और इसके अलावा डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम को मिशाइल मेन के नाम से भी जाना जाता है। डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम सन 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (Indian Space Research Organisation, ISRO) में आये, और उनहोंने सन 1980 में पृथ्वी कि कक्षा के पास ही रोहिणी उपग्रह को स्थापित किया। इसके बाद उनहोंने गाइडेड मिसाइल्स को बनाया और फिर अग्नि और प्रिथ्वी मिसाइल को भी बनाया।
2. रतन नवल टाटा
रतन नवल टाटा सन 1991 में टाटा संस के अध्यक्ष बने। रतन नवल टाटा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाटा केमिकल्स और टाटा टी को काफी ऊंचाई पर पहुंचा दिया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विस भारत कि सबसे बड़ी सुचना तकनीक कंपनी है। रतन नवल टाटा 65 वर्ष कि उम्र में अपने पद से रिटायर हो गए, लेकिन सिर्फ 21 साल के अपने अध्यक्षता में उनहोंने टाटा उद्योग को इतना आगे बढ़ाया जो अपने आप में एक मिशाल है। रतन नवल टाटा ने नेल्को और सेन्ट्रल इण्डिया टेक्सटाइल जैसी घाटे में चल रही कंपनी को मुनाफे कि इकाई में बदल कर अपनी प्रतिभा दिखाई। Motivational success stories
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3. अमर्त्य सेन- Motivational success stories
अमर्त्य सेन का जन्म कोलकाता में हुआ था। अमर्त्य सेन जी ने शांति निकेतन और प्रेसिडेंसी कॉलेज से सिक्षा प्राप्त करने के बाद कम्ब्रिज कॉलेज से डॉक्टरेट कि डिग्री ली। अमर्त्य सेन पहले ऐसे भारतीय नागरिक थे जिन्हें गरीबी और भुखमरी जैसे सब्जेक्ट पर लिखने के कारण सन 1998 में अर्थशाश्त्र का नोबल पुरस्कार दिया गया था।
4. एन आर नारायणमूर्ति
नागवार रामाराव नारायणमूर्ति का जन्म मैसूर में हुआ था। एन आर नारायणमूर्ति ने सन 1967 में मैसूर कॉलेज से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग कि उपाधि ली और सन 1969 में कानपूर से मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी कि डिग्री भी प्राप्त कि। एन आर नारायणमूर्ति के अनुसार आप कहाँ से और किससे सीखते हैं यह इम्पोर्टेंट नहीं है, बल्कि इम्पोर्टेंट यह है कि आपने क्या सिखा और कैसे सिखा। एन आर नारायणमूर्ति कहते हैं कि नाकामयाबी से सिक्षा लेना आसान होता है। अगर आप में कुछ नया सिखने कि कला है, और आप नए विचारों को जल्द अपना सकते हैं, तो ही आप सफल हो सकते हैं। Motivational success stories
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;very good
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