बेटी और बहु दोनो को बचाओ- Beti bahu fark

बेटी और बहु दोनो को बचाओ- Beti bahu fark

Beti bahu fark जो बेटियों के साथ अच्छा सुलूक नहीं करते हैं और बेटी होने से दुखी हो जाते हैं। हम सब उन लोगों को अच्छा नहीं समझते हैं और ऐसे लोगों के बारे में तरह-तरह कि बातें करते हैं कि यह कैसा इंसान है जिसे बेटी कि महत्व का पता नहीं। लेकीन अब लोगों कि सोच बहुत बदल गयी है। अब बेटी होने पर लोग दुखी नहीं बल्कि खुश होते है और इस बात को जानते हैं और कहते भी हैं कि बेटी तो घर कि लक्ष्मी होती है। लेकिन इस तरह के अच्छे सोच रखने के बावजूद समाज में एक बहुत गन्दी सोच आज तक चली आ रही है। जो अभी तक ख़त्म नहीं हुई और वह सोच है बेटी और बहु में फर्क करना, बहु के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करना और बहु को अपने घर कि बहु समझने से ज्यादा दुसरे कि घर से आनेवाली बेटी समझ कर उसे हर बात में ताना देना कि यह तुम्हारा घर नहीं है।

बेटी ही बहु बनती है- Beti bahu fark 

यह एक सच्चाई है कि बेटी ही बहु बनती है, चाहे वह बेटी हमारे घर से दुसरे के घर बहु बन कर जाए या दुसरे कि घर कि बेटी हमारे घर बहु बन कर आये, होती तो वह बेटी ही है जो किसी के यहाँ बहु बन कर जाती है। बस लोग इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि आज हमारे घर अगर किसी कि बेटी बहु बन कर आई है तो कल हमारे घर कि बेटी भी तो किसी दुसरे के घर बहु बन कर जायेगी। तो फीर क्यों ना दुसरे कि घर के बेटी और बहन के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए जिस से कि हमारे घर कि बेटी और बहन के साथ अच्छा व्यवहार हो इसलिए कि आदमी को वही मिलता है जो वो करता है। Beti bahu fark

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क्या सच में बहु ही बेटी है? 

यह सच मे एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्या बहु भी बेटी है? अक्सर लोग यह कह देते हैं कि बहु भी तो बेटी होती है लेकिन हमारे समाज में हो रही बेटी और बहु में फर्क को देखने से यह बात तो मानो ऐसा लगता है कि बस कहने के लिए ही है सच तो कुछ और ही है।
आइये अब हम आपको वो बातें बताते हैं जो अक्सर बेटी और बहु के बारे में बोला जाता है और उन्हीं बातों से बेटी और बहु में बहुत बड़ा फर्क नजर आने लगता है। 
बेटी माँ को जवाब देती है तो बोला जाता है कि अभी नासमझ है और अगर बहु कुछ कह दे तो उसको ताने दिए जाते हैं कि तुम्हारी माँ ने तुम्हें बड़ों से बात करना सिखाया नहीं है।
बेटी देर तक सोती रह जाए तो कोई बात नहीं लेकिन अगर बहु को एक दिन उठने में देर हो जाये तो सास का मुंह फुल जाता है।
बेटी चाहे जितनी देर फोन पर बात करे तो कोई बात नहीं कहा जाता है कि अभी ही तो उसके बात करने के दिन है लेकिन अगर बहु थोड़ी देर भी बात कर ले तो सब लोगों को बताने लगती है कि दिन भर बस फोन पर ही बात करती है घर के काम से कोई मतलब है ही नहीं।
बेटी घर में काम ना करे तो कहते हैं कि छोटी है लेकिन अगर बहु सब काम भी करे इसके बावजूद भी बोला जाता है कि बड़ी हो गयी मगर काम करने का तरिका नहीं आया। 
बेटी अगर ससुराल में खुश हो तो अच्छा लगता है लेकिन बहु खुश हो तो ख़राब लगता है। 
दामाद बेटी कि बात मानें तो अच्छा लगता है कि मेरा दामाद तो हिरा है लेकीन बेटा आगर बहु कि एक बात भी मान ले तो फिर उसे जोरू का गुलाम बोला जाता है। 
बेटी जींस भी पहने तो कोई बात नहीं, फैशन का दौर है बोला जाता है लेकिन बहु को शूट और सलवार पहनने के बावजूद बेशर्म ही बोला जाता है। 
बेटी कि सास और ननद अगर काम ना करे तो बहुत गुस्सा आता है लेकिन खुद बहु के काम में मदद ना करे तो कोई बात नहीं। 
बेटी को ससुराल में काम करना पड़ता है तो चिंता होती है और बहु अकेले काम भी करे तो काम चोर ही कहलाती है।
बेटी अगर घर में कोई काम करे तो उसकी मदद कि जाती है लेकिन अगर बहु कुछ मदद करने को कह दे तो कहा जाता है कि ननद को काम करने के लिए कहने में शर्म नहीं आती।
ससुराल वाले अगर बेटी को ताना दे तो बहुत गुस्सा आता है और खुद बहु के साथ उसके घर वालों को भी ताना दे तो अच्छा लगता है।
बेटी के बारे में कहतें हैं कि ससुराल में क्या मिल जाएगा खाने के लिए वहीँ बहु उसके घर में क्या खा लेती है। 
बेटी अगर प्रेगनेन्ट हो तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाकर कहतें हैं कि अब जमाना पहले कि तरह नहीं है वहीँ अगर बहु को दिखाने कि बारी आती है तो कहते हैं कि हम भी तो माँ बने हैं लेकिन कभी डॉक्टर के पास नहीं गए। Beti bahu fark

बेटी और बहु में फर्क करने वाली सोच मिटाओ- Beti bahu fark

अब तो आप लोगो को यह अंदाजा हो ही गया होगा कि बेटी और बहु में कितना फर्क किया जाता है कि हमें बहु तो चाहिए कामवाली और बेटी को ऐसा ससुराल मिले जो उसे रानी बनाकर रखे। एक ही औरत यानि सास या फिर कोई और किस तरह दो रंग कि बातें करते हैं और बेटी और बहु में फर्क करते हैं।  इस तरह कि सोच रखने वाले लोगों से हमारा समाज कभी एक अच्छा समाज नहीं बन सकता है। और अगर यही हाल रहा तो कभी दुसरे के घर कि बेटी तो कभी हमारे घर कि बेटी का जीना भी बहुत मुश्किल हो जाएगा।  इसलिए हम आज से ही अपने इस सोच को बदले और बेटी के साथ बहु को भी बचाए,उसे अपनाए बहु को दुसरे कि घर कि बेटी समझने के बजाये अपने घर कि बेटी समझे तभी इन बेटियों को ख़ुशी मिलेगी और फिर हम भी खुश रहेंगे।

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14/post a comment

  1. Beti bachao beti padhao kyuki beti wo har kuchh kr skti h jo ldka kr skta h

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  2. Khud bahu thi to achchha thi.jab sas ban gayi to bahu kharab ho gayi? Bahu se hi to sas bani hai

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